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शनिवार, 17 फ़रवरी 2018

जानिये देश के विभाजन के लिए कौन लोग जिम्मेवार थे !


यह सवाल गढे मुर्दे उखाड़ने लिये नहीं, बल्कि फिर ऐसी साज़िशे कामयाब ना हों इसलिये उठाना जरूरी समझता हूँ आखिर देश के बंटवारे के लिये कौन कौन दोषी थे और कौन नहीं, इस विषय में चर्चा करने के लिये जाहिर हैं बड़े बड़े नाम लेने पडेंगे, जो लोग इस दुनियाँ से जा चुके हैं फिर भी इतिहास से सबक लेना ही पड़ता है, इसलिये इतिहास का पुनरीक्षण करते हैं और नज़र डालते हैं उन नामचीन लोगों पर जिनका नाम आज़ादी की लड़ाई से जुड़ा हुआ था.यह सच है कि आम जनता विभाजन के पक्ष में नहीं थी और अधिकतर लोगों को ऐसा अंदाज़ा भी नहीं था कि देश के अहित में यह फैसला उनके नेता ले लेंगे. क्योंकि विभाजन से अगर किसी को फायदा हुआ तो वो थे अमरीका और रूस. एक और बात काबिले गौर है कि आज़ादी के समय पूरे संसार में ब्रिटिश राज्य का पतन होने लगा था और ब्रिटेन अमरीका का पिछलग्गू बनने की कगार पे आ चुका था. ऐसे में अमरीका का दबाव होना बहुत स्वभाविक था और अमरीका की मौकापरस्ती दुनियाँ को जाहिर हैं.

ब्रिटिश राज : यह तो जग जाहिर है कि अंग्रेज़ों की यह चाल थी और इसी लिये उन्होंने आज़ादी के लिये बंटवारे की शर्त रखी. लेकिन हमारे नुमाइंदे जो अंग्रेजो को बिक चुके थे इस बात को स्वीकार क्यों करने लगे. आज़ादी के लिये कुछ लोगों ने दलालों का काम किया, दलाल बेचने और खरीदने वाले दोनों से कमीशन खाता है, इन दलालों ने अंग्रेज़ों की हाँ में हाँ मिलकर सत्ता सुख भी लिया और आज़ादी का श्रेय लेकर आज़ाद भारत में अपनी सरकार में सीट भी पक्की की. इन लोगों के नाम पोस्ट की अगली कड़ी में आने ही वाला है. यह तो सच है बंटवारे की चाल ब्रिटिश राज की थी लेकिन यह चाल कभी कामयाब नहीं होती अगर घर के भेदी समझौते पर हस्ताक्षर ना करते, आज़ादी मिलना तो तय ही था, जल्दबाजी में यह फैसला लेने के कारण आज दक्षिण एशिया में जो अशान्ति, आतंकवाद का वातावरण है, उससे बचा जा सकता था और जो पैसा भारत और पाकिस्तान रक्षा बज़ट में खर्च करके अमरीका और रूस को मालामाल करते रहे उससे इस देश की खुशहाली में चार चांद लगते.
 कांग्रेस : जैसा कि सब जानते हैं, कांग्रेस का जन्म अंग्रेज़ों के साथ सत्ता में भागीदारी के लिये एक ब्रिटिश ने ही किया था. कांग्रेस ने अंग्रेज़ों के साथ सत्ता सुख भी भोगा, उस समय के अभिजात्य और महत्वपूर्ण लोगों के नाम पर, जिनका जनता पर प्रभाव था अंग्रेज़ों के राज्य में कांग्रेस के नुमाईंदों को वो सारे सुख साधन उपलब्ध थे जो अंग्रेज़ अफ़सरों को थे, उन सबका रहन सहन भी अंग्रेज़ों जैसा ही था और कांग्रेस ने ही बंटवारे के मसौदे पर हस्ताक्षर किये गये. इसका मुख्य विवरण इस प्रकार है इससे साफ जाहिर होता है कि मसौदे पर दस्तखत करने में प्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस ( नेहरू) और मुस्लिम लीग ( जिन्ना ) थे.



शनिवार, 10 फ़रवरी 2018

जानिये भगांकुर (clitoris) क्या है और यह क्या करता है? क्या यह जी-स्पॉट के समान है?

Clitoris भगांकुर  योनी के शीर्ष पर स्थित एक छोटा, संवेदनशील अंग है, मूत्रमार्ग के ऊपर और योनि खोलने के ऊपर। Clitoris का कार्य खुशी प्रदान करना है। कई महिलाएं और लड़कियों को छूने का आनंद मिलता है, या उनके साथी अपने Clitoris को छूते हैं क्योंकि यह कामयाब हो सकता है और उन्हें भी संभोग सुख दे सकता है।

जी स्पॉट योनि के अंदर है, मोर्चे की ओर शरीर के सामने की तरफ और योनि के अंदर अन्य क्षेत्रों की तुलना में एक अलग बनावट है। कुछ लड़कियों और महिलाओं का कहना है कि इस स्थान पर रगड़ना उन्हें एक संभोग सुख देता है। कभी-कभी यह कामोत्तेजना और स्खलन भी प्रदान करता है। अर्थात्, संभोग के दौरान कुछ लड़कियां मूत्रमार्ग के नजदीक वाले इलाके से तरल पदार्थ को स्प्रे करती हैं- जो पेशाब नहीं होता -।

जी स्पॉट खोजना मुश्किल हो सकता है. आप  जब योनि में अपनी एक उंगली डालती है, तो एक घड़ी के रूप में उद्घाटन के बारे में सोचो। शरीर के सामने की तरफ ओर पैल्विक हड्डी की तरफ दबाना, 12:00 है और गुदा की ओर दबाने 6:00 है अधिकांश महिलाओं पर जी-स्पॉट 12:00 बजे है यह योनि के प्रवेश द्वार के अंदर एक इंच या दो के बारे में है, और त्वचा असमान महसूस करती है। तीव्र उत्तेजना के दौरान ऊतक आम तौर पर थोड़ी सूजन करता है।

चूंकि प्रत्येक व्यक्ति को अलग तरह से स्पर्श करना पसंद है, इसलिए अपने साथी से बात करें कि क्या अच्छा लगता है, जैसे कि जगह छू रही है और प्रयोग की जाने वाली दबाव की मात्रा। अधिकांश लोग इस बात से सहमत होंगे कि संचार स्वास्थ्य संबंधी यौन अनुभवों की महत्वपूर्ण है

वैसे, पुरुषों के पास "नर जी स्पॉट" है: प्रोस्टेट ग्रंथि

रविवार, 28 जनवरी 2018

गर्व का पतन संभव है

PRIDE HAS A FALL

शरद ऋतु का समय था. एक जैतून का पेड़ और अंजीर का पेड़ एक दूसरे के पास खड़े थे. शर्दी में अंजीर के पेड़ ने अपने सभी पत्ते खो दिए और काफी नग्न हो गया. अपने पड़ोसी को ऐसी हालत देखते हुए, जैतून का वृक्ष गर्व के साथ फुसफुसाया.

जैतून के पेड़ ने अंजीर के पेड़ को ताना मरते हुए कहा, "यार तुम कैसे बदकिस्मत हो! आप अपने पत्ते हर शरद ऋतु में खोकर नंगे हो जाते हो। लेकिन मैं पूरे वर्ष के दौर में सदाबहार रहता हूं। '

अंजीर के पेड़ ने तर्क दिया, "दोस्त! मेरा सर्दियों में  नंगा (बिना पत्ते के हो जाना) और तुम्हारा  बर्ष पर्यंत सदाबहार रहना हमारे और तुम्हारे अधिकार क्षेत्र से बहार की बात है. आप और मैं इसके लिए कुछ नहीं कर सकते . लेकिन इसके बारे में छोटे या गर्व महसूस करना ये हमारे दोनों के बस में है. हम अपनी हीनता और दुर्बलता के लिए हीनभावना से ग्रसित नहीं होना चाहिए न ही किसी की दुर्बलता पर हमें हसना चाहिए .

एकबार शरद ऋतू में  कड़ाके की शर्दी पड़ी और उस साल भरी बर्फबारी हुई. एक दिन काफी बर्फ गिरा  जैतून के पेड़ों की पत्तियों गिरी बर्फ के भर से जैतून का पेड़ भारी होकर गिरने लगा. लेकिन अंजीर के पेड़ के लिए, बर्फ इसकी नंगे शाखाओं के माध्यम से जमीन पर गिर गई और यह बर्फ-तूफान से बच गया

बुधवार, 17 जनवरी 2018

धन जिसका कोई मोल नहीं

एक कंगाल ने अपने बगीचे में एक गुप्त जगह में अपना सोना दफनाया था। हर दिन वह वहां जाता, खजाना खोलता और टुकड़े टुकड़े गिन करके यह सुनिश्चित करने की चेष्टा करता की सभी धन सुरक्षित हैं . ऐसा उसने इतनी बार किया कि एक चोर, जो उसे बार बार ऐसा करते देख रहा था, अनुमान लगाया कि यहाँ जरुर कुछ खजाना छिपा है,  अतः एक रात चुपचाप खजाना खोला और इसे लेकर फरार हो गया ।

जब उस कंजूस ने अपने नुकसान के बारे में सुना, तो वह बहुत दुःखी हुआ और निराशा से भर गया रोने लगा. वह रोते हुए अपने बाल पकड़ कर खीच रहा था । एक यात्री ने उसे रोने कर कारण पूछा ।

"मेरा सोना! हे मेरे सोने! "कंजूस आदमी बुरी तरह से रोया," किसी ने मुझे लूटा है! "

"आपका सोना कहा रखा था ? उस गड्ढे में? तुमने वहाँ क्यों रखा? आप इसे घर में क्यों नहीं रखते , जहां आप चीजें खरीदने के लिए आसानी से इन्हें पा सकते थे? "

"खरीदें!" वह कंजूस गुस्से में चिल्लाया "क्यों, मैंने सोना कभी छुआ भी नहीं मैं इसे किसी भी खर्च के बारे में नहीं सोच सकता था। "

अजनबी ने एक बड़ा पत्थर उठाया और उसे गड्ढे में फेंक दिया। "अगर आपके साथ ऐसा हुआ है," उन्होंने कहा, "तो उस पत्थर को ढंकना। आप जितना खजाना खो चुके हैं यह उतना ही लायक है! "

नैतिक: सहेजना, बुद्धिमानी से और उचित तरीके से खर्च करना अच्छा संकेत है यदि आप इसे किसी अच्छे उद्देश्य के लिए करते हैं। अन्यथा, हमारे द्वारा उपयोग किए जाने वाले उपयोग के मुकाबले किसी अधिकार का अधिकार नहीं है।


शनिवार, 9 सितंबर 2017

सेठ और बन्दर की कहानी

एक सेठ जी थे. वे शौक से बन्दर पाल रखे था. बन्दर बहुत समझदार था. वह सेठ की नक़ल किया करता था. सेठ को गिलास से पानी पीते देख वह भी गिलास से पानी पीने लगा था. सेठ जी को पंखा झलता हुआ देख कर वह मर्कट भी पंखा झलना सीख गया था. वह कभी खुद को और कभी सेठ जी को पंखा झलता . अपने बन्दर के इस व्यवहार से सेठ जी अत्यंत खुश थे.
एक दिन सेठ जी के सो जाने के बाद वह बन्दर सेठ जी को पंखा झल रहा था. तभी एक मक्खी सेठ जी के नाक पर आकर बैठी और बन्दर उस मक्खी को बार बार भगाने लगा . जैसा कुत्ता कौआ और मक्खी का स्वभाव है वो बार बार भगाने के बाद भी पुनः वही आकर बैठते हैं, मक्खी भी बार बार नाक पर आकर बैठ रही थी. बन्दर मक्खी के इस व्यवहार से बहुत क्षुब्द होकर मक्खी पर बहुत क्रोधित हो गया. वह मक्खी को जान से मार देने के लिए कोई युक्ति सोचने लगा.

वह ऐसे किसी चीज़ की तलाश करने लगा जिससे प्रहार कर वह चंचला मक्खी की जीवन लीला समाप्त कर सके . खोजते खोजेते बन्दर को एक पत्थर मिला. वह बहुत खुश हुआ. उस समय मक्खी सेठ जे के नाक पर विराजमान थी. मर्कट शीघ्रता से पत्थर उठा कर मक्खी पर दे मारा. मक्खी तो उड़ गयी लेकिन सेठ जी के नाक के आकार विकृत हो गए.     



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गुरुवार, 7 सितंबर 2017

शिक्षा का महत्व - Importance of education

एक अनपढ़ युवक  शाइन बोर्ड बनाने वाले कंपनी में काम करता था . बोर्ड बनाने वाले कंपनी में लोगों के अपने प्रोफाइल और बिज़नस के बोर्ड के रिक्वायरमेंट्स आते थे. बोर्ड बन जाने के बाद वह युवक लोगों तक उनका बोर्ड पहुँचाया करता था और उनकी पत्ते पर बोर्ड लगाया करता था. यही उसकी नौकरी थी .
उस कंपनी में 3 आर्डर पेंडिंग थे जिनके काम चल रहा था
१ बोर्ड एक डॉक्टर का था जिसपर स्लोगन था ”पेट दर्द से निराश न हो”
२) बोर्ड एक होटल चलने वाले का था जिसका स्लोगन था “कृपया पुनः सेवा का मौका दें.”
३) बोर्ड एक श्मशान घाट का था जिसका स्लोगन था “मृतक के परिजन भीड़ न लगाएं “

बोर्ड बन जाने के बाद उस युवक को सभी बोर्ड इन पतों पर पहुंचाने थे . कंपनी द्वारा बताये गए पते पर बोर्ड लगाने के लिए वह सभी बोर्ड्स को अपनी युक्ति से रखकर रिक्शे पर बैठ गया . वह युवक अनपढ़ था अतः उसने अपने बुद्धि से ३ बोर्ड्स क्रमवार रख लिए .

लेकिन गलती से उसके बोर्ड बदल गए और तीनो पाटों पर इस क्रम से बोर्ड लगा दिया
१)       श्मशान घाट -> “कृपया पुनः सेवा का मौका दें.”
२)       डॉक्टर ->”मृतक के परिजन भीड़ न लगाएं”
३)       ढाबा ->”पेट दर्द से निराश न हो”

अपनी अशिक्षा के कारण उस युवक ने बहुत बड़ी गलती की . इसका complain कंपनियों की तरफ से आया और उसे नौकरी से निकल दिया गया.

शनिवार, 2 सितंबर 2017

वस्त्र जो आपको युवक बना दे, राजा और ठग की कहानी


 एक बार एक ठग नगर में फेरी लगा रहा था . वस्त्र ले लोवस्त्र ले लो युवा दिखने वाला वस्त्रनौजवान दिखने के लिए ये वस्त्र पहने. नगर के लोग बड़ी उत्सुकता से उसकी बात सुनते . धीरे धीरे ये बात राज दरबार तक पहुंची .

दरबारियों ने राजा से इस बात की चर्चा की. महाराज ! एक वस्त्र विक्रेता आया है जो ऐसे वस्त्र बेचने का दावा कर रहा  है जिसे पहन कर आदमी वय व किशोर दिखता है. अपने सभासदों से ये बात सुनकर राजा  ने उन्हें आज्ञा दिया की शीघ्र ही उस व्यापारी को हमारे सन्मुख प्रस्तुत किया जाए. राजा की आज्ञा के अनुसार उस वणिक को राजा के सम्मुख प्रस्तुत किया गया.

ठग वणिक ने राजा के तरफ बहुत विश्वास भरी दृष्टि से देखा. राजा ने बनिये से पूछा क्या तुम ऐसा वस्त्र रखे  हो जिसे धारण करने से कोई अधेड़ उम्र का व्यक्ति भी युवा दिखने लगेगा. वनिए ने स्वीकृति में सिर हिला दिया. राजा ने कहा! फिर तुम वो वस्त्र मुझे शीघ्र दिखावो.

इसपर उस ठग वस्त्र विक्रेता ने कहा!

महाराज ये वस्त्र सचमुच धारण करने वाले को युवक सदृश बना देता है लेकिन एक शर्त है. ये सिर्फ बुद्धिमानों को ही दिखेगा अबोध मंद्बुधि लोगों पर इसका कोई असर नहीं होगा . अर्थात आपको वस्त्र धारण किये हुए अगर कोई बुद्धिमान व्यक्ति देखता है तो आप युवक दिखेंगे वही एक मतिमंद को आप पूर्ववत दिखेंगे .

राजा ने बनिए के इस शर्त को स्वीकार कर लिया . अब राजा के दरबारी बनिए द्वारा दिए गए शर्त पर विचार कर अपने अपने को उसके अनुसार तैयार करने लगे . राजा के मंत्रीरानी तथा दुसरे मुख्य सभासदों ने सोचा की यदि राजा वस्त्र धारण करने पर हमें युवक नहीं दिखे तो हमारी नौकरी तो संकट में अतः मैं भी बोलूँगा की राजा युवक सदृश दिख रहे हैं .

राजा की अनुमति से उस ठग ने राजा के पुरे वस्त्र उतरवा दिए फिर अपने हाथ से राजा के शारीर पर कपड़ों की पट्टी लगा कर कुछ देर बाद उस पट्टी को भी उतार दिया.
राजा अब बिलकुल नग्न थे. अब ठग ने सबसे पहले राजा के मंत्री से पूछा क्या महाराज आपको युवक दिख रहे हैं . मंत्री को तो राजा नग्न ही दिख रहे थे, लेकिन अगर वह सच बोल दे तो राजा समझेंगे मेरा मंत्री मुर्ख है तभी इसको मेरा युवा शारीर नहीं दिख रहा है. यही सोचकर मंत्री ने उस ठग से कहा की महाराज तो अब सचमुच युवक दिखने लगे. इसी तरह की प्रतिक्रिया रानी और सभी सभासदों की थी .


अब राजा  ने इस ख़ुशी में जुलुस निकालने का आदेश दिया. राजा  अपने इस नए रूप में हाथी पर बैठ कर नगर भ्रमण के लिए निकल पड़े. राजा को इस रूप में देखकर लोग शर्म के मारे नजरें झुका ले रहे था. राजा  इसे अपने नागरिकों का अभिवादन समझ रहे थे. कुछ दूर जाने के बाद नगर में खेल रहे बच्चों की नजर जुलुस पर पड़ी उन्होंने जोर जोर से शोर मचाना शुरू किया अपने महाराज नंगे महाराज नंगे.

बच्चों के मुख से ऐसा सुनकर राजा  ने अपने समीप बैठे मंत्री से पूछा महामंत्री ये बच्चे ऐसा क्यों कह रहें हैं . इसपर मंत्री ने कहा ! महाराज ये बच्चे अबोध हैं अतः आप इन्हें युवक नहीं दिख रहे हैं .

रजा नगर भ्रमण कर घर पहुंचे. राजा ने मंत्री को पास बुलाया. उन्होंने मंत्री से कहा हमें तो लग रहा था, वो बच्चे ही सही कह रहे थे. क्योंकि ऐसा सच बोलने में इनको कोई राज दंड का भय नहीं सता रहा था. यह बच्चों की निर्भय अभिव्यक्ति थी. वहीँ दूसरी ओर हमारे सभी सभासद रानियाँ और आप भी भयवश अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे. मंत्री ने राजा से नतमस्तक होकर माफ़ी मांगी. राजा ने अपने मंत्री से कहा भविष्य में आप किसी भी बात पर उन बच्चों की तरह निर्भय होकर प्रतिक्रिया देंगे.

  

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