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पालतू कबूतर और धूर्त शिकारी - paltu kabutar aur dhurt shikari

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एक शिकारी जंगल से कबूतर पकड़ कर लाता है। उसे अपने घर पर पिंजड़े में रखता है। कबूतर धीरे धीरे पालतू बनते जाता है। शिकारी कबूतर को काजू बादाम खिलता है। कबूतर मोटा तगड़ा हो जाता है। कबूतर शिकारी के यहाँ अपने को बहुत सुखी समझता है। कबूतर जंगल में अपने पुराने मित्रों और परिवार को भूल जाता है। कबूतर शिकारी को अपना सर्वस्व समझने लगता है।


एक दिन शिकारी कबूतर को जंगल में ले जाता है। शिकारी जाल बिछाता है और उस जाल के बगल में कबूतर को पिंजड़े सहित रख देता है। अब शिकारी पास के झाडी में जाकर छुप जाता है। शिकारी वहीँ से आवाज लगता है "बोलो बेटा"। कबूतर शिकारी की आवाज सुन जोर जोर से बोलने लगता है। कबूतर की आवाज सुनकर पास के पेड़ पर बैठे कबूतर सोंचते हैं ये कबूतर मुसीबत में है इसे बचने का प्रयास करना चाहिए। ये सोचकर कुछ कबूतर पेड़ पर से उतरकर पिजड़े में बंद पालतू कबूतर के पास आते हैं और वहां बिछाए गए जाल में फँस जाते हैं।
अब धूर्त शिकारी आता है एक एक कर सभी कबूतरों को पकड़ लेता है। शिकारी सभी कबूतरों को भर ले कर आता है। अब शिकारी पालतू कबूतर को पिंजड़े में तंग देता है। फिर इस पालतू कबूतर के सामने स…

आप दूसरे के बारे में भला सोचोंगे तो वो भी आपका भला सोचेंगे

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Think Positive About Someone He Will Think Positive Too

विद्वानों  का मत है की अगर आप दूसरे के बारे में भला सोचोंगे तो वो भी आपका भला सोचेंगा। चन्दन का एक व्यापारी था। चन्दन के लकड़ियों का उसका  व्यवसाय बहुत अच्छा चल रहा था। उसने व्यापार के समृद्धि के लिए बहुत सी चन्दन लकड़ियां इकठ्ठा कर रखी  थी ताकि बाजार में बढ़ते मांग को पूरा किया जा सके। फिर बाजार में मंदी  आने से उसका व्यवसाय बिल्कुल  मंद पड़  गया। वह अपने व्यवसाय के प्रति चिंतित रहने लगा। एक दिन राजा के यहाँ से उसका बुलावा आया। चन्दन का व्यवसायी राजा के दरबार में प्रस्तुत हुआ। व्यापारी अपने व्यवसाय से चिंतित था। राजा को देखकर उसने सोंचा ! अगर राजा की मृत्यु हो जाती है तो इनके अंतिम संस्कार के लिए मेरी चन्दन की लकड़िया बिक जाएंगी। राजा ने भी व्यापारी के तरफ ललचायी हुई नज़रों से देखा। राजा ने सोंचे इस धनी व्यापारी ने चन्दन की लकड़ियां बेचकर बहुत से पैसे कमाएं हैं। इसपर मैं यदि भारी कर लगता हूँ तो मुझे बहुत बड़ा राजस्व लाभ होगा। राजा ने व्यवसायी के प्रति ये भाव रखा और कुछ देर बातचीत के बाद उसे अतिथि विश्राम गृह में जाने को क…

टोपी विक्रेता और बंदर

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एक टोपी विक्रेता था । वह गावँ शहर घूम घूम कर टोपी बेचा करता था । एक दिन वह अपने व्यापर के लिए एक गावँ में घूमकर खूब फेरी लगाया । सुबह से दोपहर हो गयी एक भी टोपी नहीं बिकी । दिन ढलने पर वह शहर की ओर जाने लगा । रास्ते में एक पेड़ की घनी छाव दिखी। उसने अपने साईकिल को पेड़ से लगाया तथा प्रचार के लिये जो टोपी पहन रखा था वही पहने सो गया ।


थके हुए टोपी विक्रेता को पेड़ की ठंढी छावं में शीघ्र ही नींद लग गयी । उस पेड़ पर कुछ बन्दर बैठे थे । बंदरों ने उस टोपी विक्रेता की तरफ बड़े गौर से देखा । फिर पेड़ पर से एक बन्दर उतरा और साईकिल की हैंडल पर रखी टोपी को उतारकर पहन लिया और पेड़ पर जा बैठा । अब उस बन्दर की देखा देखी एक एक कर सभी बन्दर उतरते और टोकरी में झलक रही टोपियों में से एक निकालते और पहन कर पेड़ पर बैठ जाते । इस तरह टोपी विक्रेता की टोकरी खाली पड़ गयी। पेड़ पर एक बन्दर बिना टोपी के रह गया था । वह बन्दर भी नीचे उतरा और फेरीवाले विक्रेता के सिर से टोपी उतार कर पहन लिया और पेड़ पर बैठ गया।

कुछ देर बाद फेरीवाला जब सर खुजलाते उठा तो उसे महसूस हुआ की उसके सर पर टोपी नहीं है। उसने साईकिल पर रखी अपनी टोपिय…

व्यवसाय के लिए धन मूल आवश्यकता नहीं - Funding is not a fundamental requirement for business

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व्यवसाय के  लिए धन मूल आवश्यकता नहीं। किसी भी व्यवसाय के लिए धन की आवश्यकता  होती है लेकिन धन से भी जरुरी है  व्यवसायिक बुद्धि। 
दो व्यवसायी आपस में बात कर रहे थे। पहले व्यवसायी का व्यापर सही चल रहा था दूसरे के पास काफी आर्थिक तंगी थी वाणिज्य में घाटे से उसके पास नए व्यवसाय के लिए पैसे नहीं थे। वह अपने मित्र से यही दुःख बार बार रो रहा था। पहला व्यापारी जो धनि था उसे व्यवसाय का अनुभव था। वह अपने मित्र से बार बार यही कहता वाणिज्य के लिए धन का होना कोई जरूरी नहीं उसके लिए तो व्यावसायिक बुद्धि ही पर्याप्त है।
निर्धनता से दुखी दूसरे मित्र को ये बात काफी अटपटी लगी वह झुंझला कर बोला। मित्र तुम कैसी अटपटी बात कर रहे हो भला बिना पैसे के रोजगार कैसे हो सकता है क्यों मेरे निर्धनता का उपहास  कर रहे हो। पहले मित्र ने उसे समझते हुए कहा मैं सच कह रहा हूँ। ये जो तुम्हारे बगल में चूहा मरा पड़ा  है न तुम इससे भी व्यवसाय कर सकते हो। 

दूसरे मित्र ने वह मृत चूहा उठाया और साप्ताहिक बाजार की ओर दोनों चल पड़े। बाजार में एक बनिया पालतू जानवर कुत्ते बिल्ली बेचता था। उसके जानवरो को खाने के लिए कुछ नहीं मिल रहा …

किसी को सही से समझने के लिए लंबा समय देना पड़ता है

एक बुद्धिमान बनिया के चार पुत्र थे। वह अपने पुत्रों को शिक्षा दे रहा था। बनिए ने अपने पुत्रों को एक दिन समझते हुए कहा की किसी भी चीज़ के बारे में हमें सही जानकारी लेने के लिए उसे लंबे समय तक देखना पड़ता है। तभी हम उसके प्रकृति और स्वभाव  के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

वणिक पुत्रों को पिता के बात पर विश्वास नहीं हुआ। एक पुत्र ने कहा की पिताजी किसी बस्तु को हम देख के कुछ छड़ों में ही इसके बारे में बता सकते है इसमें इतन समय व्यर्थ करने की क्या जरुरत है। उसके बात से बाकी दोनों भाइयों ने सहमति दिखाई। उन तीनो लड़कों ने एक साथ कहा पिता जी हम अपने दूकान में रखी बस्तु को तो शीघ्र ही पहचान जाते हैं फिर आप ऐसा क्यों बोल रहे हैं।

फिर उस वणिक ने चार चार महीने के अंतराल पर अपने सभी पुत्रों को संतरे के पेड़ खोजने के लिए भेजा। उसने कहा की अपने बाग़ में संतरे का पेड़ नहीं है हम चाहते हैं की अपने बाग़ में भी संतरे के पेड़ हो

पिता की आज्ञा पाकर पहला पुत्र पेड़ की तलाश में चल पड़ा। लोगो से पूछते हुए वह संतरे के पेड़ के पास पहुँचा। उसने संतरे के पेड़ को देखा वह टेढ़ा मेढा  और सुख हुआ था। सूखे पेड़ को…

मक्खीचूस बनिए की कहानी

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मक्खीचूस बनिया की कहानी
एक बनिया था। उसका तेल और घी का व्यवसाय था। अपने ग्राहकों को सामान देते समय वो इस बात का ख्याल रखता था कि कही तौल में किसी ग्राहक को ज्यादा सामान तो न दे दिया। उसकी कंजूसी का उसके परिवार वालों तथा नौकर चक्रों को भी पता था।



सुबह उठ कर वह अपने दूकान पर जाता था। दुकान जाते समय वह अपने कुर्ते को कंधे पर रख लेता था और अपने जूते हाथ में ले लेता था। जब जब दूकान नजदीक आता था तो कंधे से कुर्ता उतार कर पहन लेता था, और पैरों से धूल झाड़कर जूते भी पहन लेता था। उसका ऐसा मानना था कि ऐसा करने से उसके कपडे तथा जूते ज्यादा दिन तक चलेंगे।

एक बार साहूकार ने गावँ के ग्वाले से घी खरीदी। सुबह वह घी ले कर अपने दूकान जाने लगा। रास्ते में उसे ख्याल आया की अरे पंखा तो चलता छोड़ आया हूँ अगर वापस जाकर पंखा ऑफ नहीं करता हूँ तो कितने की बिजली बर्बाद हो जायेगी। कंजूस बनिया कंधे पर कुर्ता, एक हाथ में जूते तथा दूसरे हाथ में घी के बर्तन लिए घर की ओर वापस चल पड़ा।  घर पहुंचकर सेठ ने दरवाजा खटखटाया। अंदर से नौकर ने आवाज लगायी कौन है ? सेठ जी बोले मैं हूँ दरवाजा खोलो। नौकर ने कहा सेठ जी आप वापस क्यों…

हमेशा एक बुद्धिमान व्यक्ति द्वारा सलाह लें

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Always Take Advice By a Wise Man एक कुम्हार था।  वह मिटटी के बर्तन बनाकर बेचा करता था. कुम्हार की पत्नी हमेसा उसे कोशते रहती थी। वह चाहती थी की कुम्हार ज्यादा काम करे जिससे परिवार में पैसा आये। वह कुम्हार को हमेशा दिमाग लगाकर सुन्दर कलाकृति से युक्त बर्तन बनाने को बोलते रहती थी।  लेकिन कुम्हकार जितना दिमाग लगा सकता था उसी हिसाब से साधारण बर्तन बनाया करता था।

वही दूसरे कुम्हार सुन्दर कलाकृति वाले बर्तन बना कर खूब पैसे काम रहे थे। ज्यादा पैसा होने से उनका जीवन स्तर अच्छा था। कुम्हार की पत्नी अपने सहेलियों में पहनावा और वेशभूषा से खुद को हीन समझती थी। इस हीन भावना के निवारण का एक ही उपाय था की कुम्हार भी सुन्दर बर्तन  बनाने लगे जिससे ज्यादा पैसा बन सके। 

कुम्हार भी अपने इस व्यवहार से दुखी था लेकिन मजबूर था वह दूसरे कुम्हारों की तरह कल्पनाशील नहीं था जिससे दिमाग का उपयोग कर रचनात्मक बर्तन बना सके। एक दिन कुम्हार बर्तन बनाने के लिए मिटटी लाने खेतों में गया था। खेत से मिटटी इकठ्ठा करते समय वह रोने लगा और धरती माँ से विनती करने लगा।  हे माँ!  तूने मुझे इतना मंद मति का क्यों बनाया जिससे म…

हजारों साल चलने वाला पंखा

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हजारों साल चलने वाला पंखा....एक बार एक धूर्त पंखा बिक्रेता नगर मे घुम घुमकर पंखा बेच रहा था। पहले के जमाने मे यातायात के साधन कम थे । बिक्रेता पैदल ही घुम घमकर फेरी लगाकर समान बेचते थे ।
धुर्त बिक्रेता अवाज लगा रहा था । पंखा ले लो हजारों साल चलने वाला पंखा जन्म जन्मान्तर तक चलने वाला पंखा । नगर के सभी लोग  आश्चर्य से पंखा बिक्रेता की ओर देख रहे थे लेकिन किसी को उससे पंखा खरीदने की हिम्मत नही हो रही थी।


पंखा बिक्रेता अवाज लगाते हुए राजा के महल के समीप पहुचा । पंखा बिक्रेता आवाज लगा रहा था ......हजारों साल चलने वाला पंखा। राजा ने उसकी आवा ज सुनी और दरबारि यों से बुलाने को कहा। दरबारी पंखे वाले को राजा के समक्ष प्रस्तुत किये । राजा ने पंखा बिक्रेता से पुछा कहो कैसा पंखा बेच रहे हो .....बनिये ने राजा को पंखा दिखाया। राजा ने पुछा क्या यह पंखा सच मे हजार साल चलने वाला है । बनिये ने कहा हा महाराज! राजा ने कुतु हल बस पंखा खरीद लिया । राजा के सेवक राजा को पंखा झलने लगे । राजा के सेवकों मे इस नये पंखे को झलने की होड लग गयी । राजा ने सेवकों का मन रखने के लिए सभी सेवकों को अवसर दिया…

राजू नाम का लड़का और धनी सेठ

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राजू नाम लड़का एक धनी सेठ के यह काम करता था। लड़का बहुत मातृ भक्त था। वह अपने माँ से पूछ कर ही सब काम करता था। वह किसी बात के निर्णय के लिए अपने बुद्धि का प्रयोग नहीं करता था। अर्थात  उसमे प्रतिउत्पन्न मतित्व की कमी थी।

एक बार सेठ ने लड़के को मजदूरी में पैसे दिए। राजू पैसे हाथ में लिए सिक्कों को उछालते हुए घर पहुँचा। उछालने से बहुत से सिक्के रास्त में खो गए।  बच्चे खुचे सिक्कों के साथ घर पहुँचा तो माँ ने राजू से उदासी का कारन पूछा।  राजू ने बताया की सेठ ने मुझे दस सिक्के दिए थे लेकिन कुछ सिक्के रास्ते में गिर गए। माँ ने उसे समझते हुए कहा कोई बात नहीं बेटा अब सेठ कोई भी चीज दे तो उसे जेब में रख कर लाना।
कुछ दिन बाद सेठ की गाय ने बछड़े को जन्म दिया। सेठ ने राजू को कहा की आज तुम गाय का दूध लेते जाना। राजू ने माँ के कहे अनुसार दूध जेब में रख लिया। जेब में दूध रखने से सारा दूध निचे गिर गया। उदास होकर राजू जब घर पहुँचा तो माँ ने उसे समझते हुए कहा कोई बात नहीं बेटा अब से तुम जो कोई सामान लाना बाल्टी में लाना। मैं तुम्हे ये बाल्टी देती हूँ इसे अपने साथ ले जाना सेठ जब भी कोई सामान दे इसमें रख ल…

ईमानदारी सर्वोत्तम नीति है, बेईमान ग्वाला

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एक दूधवाला बेईमानी का सहारा लेकर बहुत अमीर बन गया। उसे शहर जाने के लिए रोज रास्ते में एक नदी  पार करनी पड़ती थी। शहर में उसके ग्राहक रहते थे और वह रोज शहर जाकर अपने ग्राहकों को दूध देता था। नदी पार करने के लिए वह रोज अपने दूध के बर्तन के साथ नाव पर बैठ जाता था। नदी पार करते हुए वह दूध के बर्तन का मुह खोल कर दूध में पानी मिला लेता था। लाभ कमाने के लिए वह रोज इसी तरह दूध में पानी मिला देता था और ऐसा करके वह अच्छा लाभ कमाने लगा। एक दिन वह अपने बेटे के शादी का जश्न मानाने के लिए ग्राहकों से देय राशि वसूलने के लिए वह शहर गया।

इस प्रकार एकत्र बड़ी राशि से , वह सुन्दर कपड़े और शानदार सोने के गहने खरीदा।  अपने घर जाते समय जब वह नदी पर कर रहा था थो नाव नदी में डूब गयी। दूधवाला तैरना जनता था वह तैर कर नदी के किनारे पहुँच गया लेकिन उसके सभी कीमती कपडे नदी के तेज धार में बह गए। शानदार चमकते सोने के गहने नदी में डूब गए और वह चाह कर भी उन्हें नहीं बचा सका। दूध विक्रेता के दु:ख से अवाक था। उस समय वह नदी से एक आवाज सुना, "मत रोवो जो तुमने खोया है वह तुम्हारे ग्राहकों से अवैध रूप से कमाया हुआ लाभ…

धनतेरस की कहानी - धनत्रयोदशी २०१६ २८ अक्टूबर शुक्रवार

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धनतेरस धनत्रयोदशी पांच दिन तक चलने वाले दिवाली उत्सव का पहला दिन है। इस त्यौहार को धनत्रयोदशी या धनवन्तरि त्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। यह हिन्दू पंचांग( "calender") के कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष (२०१६) को धनतेरस  का त्यौहार २८ अक्टूबर दिन शुक्रवार  को है।

धनतेरस के अवसर पर धनवन्तरि की पूजा की जाती है।  धनवंतरी को सभी चिकित्सकों का शिक्षक और आयुर्वेद का प्रवर्तक माना जाता है।

इस उत्सव की विशेषता ->

धनतेरस धन के साथ जुड़ गया है और लोग इस दिन सोने या चांदी के गहने और बर्तन आदि खरीदते है,  हालांकि धनवन्तरि का धन और सोने का साथ कोई सम्बन्ध नहीं है। धन्वंतरी धन के बजाय एक अच्छे स्वास्थ्य के प्रदाता है। 

धनतेरस से सम्बंधित कहानी 

इस बारे में एक प्राचीन कथा में राजा हिमा के 16 वर्षीय बेटे के एक दिलचस्प कहानी  का वर्णन है। उसकी कुंडली ने शादी के चौथे दिन सांप के काटने से उसकी मौत की भविष्यवाणी की। उस विशेष दिन पर, उसकी नवविवाहिता  पत्नी ने उसे सोने के लिए अनुमति नहीं दी। एक ढेर में वह अपने सारे गहने और सोने और चांदी के सिक्कों को श…

प्रतिक्रिया जीवन की कसौटी - प्रतिक्रिया में व्यक्तिगत भिन्नता

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प्रतिक्रिया जीवन की कसौटी
प्रतिक्रिया जीवन की कसौटी है। एक ही बात का विभिन्न व्यक्तियों पर पात्रता के आधार पर भिन्न प्रतिक्रिया होती है। इस कहानी में तीन पात्र हैं जिनपे एक ही बात का अलग अलग असर हुआ है।

पुराने समय में राजा बलदेव  राय  राजा राज करते थे। वो बहुत ज्ञानी , न्याय प्रिय और समाज शास्त्री भी थे। व्यक्ति  के स्वभाव को वो देख कर ही पहचान लेते थे। उनके नयन करने की प्रक्रिया बहुत निराली थी। एक बार राजा के दरबार में चार चोर पकड़ कर लाये गए। चारों  का अपराध था चोरी। अलग अलग जगहों पर चारो व्यक्तियों पर चोरी का आरोप था। राजा के सिपाही इन अभियुक्तों  को दरबार में पेश  किया थे। अपराध सिद्ध होने पर इनको सजा मिलनी थी या आरोप झूठ साबित होने पर ये चारो मुक्त हो सकते थे।


राजा के समक्ष जब एक एक कर इन चारों अभियुक्तों को पेश किया गया तो राजा ने इन सभी को अलग सजा सुनाया जबकि अपराध सबका सामान था। यह देख कर सभी दरबारी चकित थे।

१) पहले अभियुक्त को राजा ने सजा सुनाई ने के क्रम में सिर्फ इतना कहा , तुम्हे ऐसा नहीं करना चाहिए " वह अभियुक्त चला गया

२) दूसरे अभियुक्त को राजा के समकक्ष पेश किया गय…

सत्य का बोध व्यक्ति के सामर्थ्य पर निर्भर है

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सत्य का बोध व्यक्ति के सामर्थ्य पर निर्भर है

भारत में प्राचीन काल में शिक्षा व्यवस्था बहुत ही सरल और सर्व सुलभ थी। कोई निर्धन व्यक्ति धनाभाव के कारण शिक्षा से वंचित नहीं रहा। छात्र गुरु के आश्रम में रहकर शिक्षा प्राप्त करते थे। भिक्षाटन से आश्रम कर खर्च चलता था।  एक दिन गुरु जी सत्य और असत्य के सन्दर्भ में छात्रों को शिक्षा दे रहे थे। गुरु जी ने छात्रों को बताया की सत्य का बोध व्यक्ति के सामर्थ्य पर निर्भर करता है। गुरु जी के मुख से ऐसा सुन कर कुछ छात्रों को आश्चर्य हुआ की यह  कैसे हो सकता है।

गुरु जी नई फिर समझाते हुए कहा कि सत्य ही ईश्वर है और सत्य बहुत बड़ा तथा व्यापक है। सत्य के बोध के लिए सत्य के व्यापक स्वरुप को जिसने अनुभव नहीं किया वह सत्य के यथार्थ को नहीं जान सकता।  छात्रों का संशय अब भी नहीं दूर हुआ।


गुरु जी अब सभी छात्रों को हथिसार में ले गए जहा एक हाथी बंधा था। अब गुरु जी ने चार छात्रों को चुना जिन्हें ज्यादा संशय था, और उनके आँख बंधवा दिए। अब एक एक छात्र से हाथी के शरीर के एक एक भाग का स्पर्श कराया गया। और उनसे पूछा गया कि यह कौन सी वस्तु है।

१) पहले छात्र को हाथी का पू…

किसान और तरबूज की कहानी

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एक छोटे से गाँव में एक बहुत ही मेहनती किसान रहता था। एक बार उसने अपने खेत में एक विशाल तरबूज उगाई। किसान अपने तरबूज का बहुत गर्व था और वह जानता था कि, यह सबसे बड़ी तरबूज जो कभी किसी ने देखा होगा। वह टकटकी लगाए अपने तरबूज की रखवाली किया करता था और उसके बारे में सोचा करता था की इस अद्भुत फल का क्या करना है।

पहले उसने सोचा कि इसे बाजार में बेच देना चाहिए, यह उसे अच्छा लाभ देगा। लेकिन फिर उसने सोचा की क्यों न इस तरबूजे को प्रदर्शनी में रखा जाए। वह इसी तरह उधेड़ बन में लगा रहा और अंत में निर्णय किया कि क्यों न इसे राजा को उपहार स्वरुप भेंट कर दूँ। किसान इसी अच्छी सोच के साथ सो गया कि वह राजा को अद्भुत तरबूज भेंट करेगा और बदले में राजा से इनाम पायेगा।
उस राज्य का राजा बहुत दयालु था और प्रजा की देखभाल करता था अतः उसे इसी बहाने अपने राज्य मे टहलने की आदत थी। वह आम आदमी के वेश में अपने नागरिकों को देखने निकल जाता था यह सुनिश्चित करने की सभी सुरक्षित थे हैं। उस रात, राजा एक साधारण आदमी के भेष में किसान के घर से होकर गुजरा। वहां राजा ने एक बड़ा तरबूज देखा और वह इसपर इतना मोहित हो गया…

धूर्त और कंजूस सियार

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दूसरे का बंधन खोलने के लिए खुद बंधन मुक्त होना जरुरी

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भागवत के कथा के बारे में हम सभी जानते हैं कि ध्यान पूर्वक इसका श्रवण करने से व्यक्ति मुक्त हो जाता है। उस व्यक्ति को परम पद मोक्ष की प्राप्ति होती है। एक बार एक भागवत कथा वाचक अपने शिष्य को कथा सुना रहे थे। कथा सुनाने के पश्चात स्रोता को वह लाभ नहीं मिला जो परीक्षित को मिला था। स्रोता को अभी भी संसार के विषय बंधन में जकड़े हुए थे। स्रोता ने अपने कथा वाचक गुरु से इसका कारण पूछा।
गुरु भी इसका रहस्य नहीं जान पाए अतः उन्होंने अपने गुरु जी के पास इस समस्या का समाधान जानने के लिए जाने का निश्चय किया। भागवत कथा वाचक अपने शिष्य के साथ गुरु आश्रम में पहुंचे। वहाँ पहुँच कर कथा वाचक गुरु ने अपने गुरु को सादर प्रणाम किया, और भागवत के कथा सुनने से शिष्य को कोई लाभ नहीं होने का कारण पूछा।

गुरु जी ने इन दोनों अतिथियों का यथोचित सत्कार किया। उसके उपरांत अपने शिष्यों से कहकर दोनों के के हाथ पैर बंधवा दिए। अब गुरु से कहा गया की आपका शिष्य बंधन में है इसका बंधन खोलिये। इसपर कथा वाचक गुरु ने कहा मैं तो खुद बंधन में हुए मैं कैसे वंधन खोल सकता हूँ। भागवत कथा वाचक गुरु के शंका का समाधान हो गया था। गुरु ने…

क्यों किया जा रहा रावण को महिमामंडित

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रावण का महिमामंडन क्यों  रावण एक खलनायक था। रामायण की पूरी कथा में राम को नायक और रावण को खलनायक बताया गया है। आजकल कुछ लोग रावण को  महिमामंडित करने में लगे हैं। ये बामपंथी सोच सनातन धर्म के लिए बहुत चिंता का विषय है। सनातन धर्म को छति  पहुँचाने के लिए विधर्मियों ने बहुत गहरी साजिस चली है। जरा सोचिये अब तक खलचरित्र के रूप में कुख्यात रावण को अब महिमंडित क्यों किये जा रहा है।

कई कुत्सित मानसिकता वाले लोग आजकल रावण को माहज्ञानी, महापंडित, कुल का गौरव बढ़ने वाला और देश भक्त बताते हैं। अगर हम किसी खलनायक को महिमामंडित कर रहे हैं तो कही न कही हम राम के प्रति उदासीन होते जा रहे हैं। रावण की बड़ाई में निकला  आप  के मुख से एक स्वर राम के प्रति आपकी निष्ठा को काम कर देता है। 

आइये  रावण से सम्बंधित कुछ  प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डालते हैं- >

१) रावण महाज्ञानी नहीं अज्ञानी था ->
रावण को महाज्ञानी मानाने वाले लोग  ये भूल जाते हैं कि ज्ञान की परिभाषा क्या है ? ज्ञान शुभ कर्म करने की प्रेरणा  देता है। अगर आप शुभ कर्म नहीं कर रहे तो आप निश्चित ही अज्ञानी है। राक्षस स्वभाव वश रावण के शुभ  कर्म …