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July, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चार मित्र और शेर - Academic versus practical education

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किताबी शिक्षा बनाम व्यवहारिक शिक्षा एक गांव में चार मित्र रहते थे। यह गांव बहुत दिनों से सूखा और अकाल से पीड़ित था। उनमे से तीन बहुत ज्यादा शिक्षित थे और अपने चौथे मित्र शिवानंद को आलसी अव्यवहारिक और मुर्ख समझते थे. शिवानंद को शैक्षणिक ज्ञान कम था लेकिन व्यावहारिक ज्ञान में  वो तीनो मित्रो से बढ़ कर था। अपनी  शैक्षणिक योग्यता पर शिवानंद के तीनो मित्र इतराते रहते थे।
चारो उच्च शिक्षा के लिए बिद्वानो के लिए मसहूर शिक्षा का केंद्र मनसा जाने का निश्चय किये। रास्ते में  एक जंगल पड़ता था।  रास्ता जंगल के बीच से होकर जाता था। जंगल में उन्होंने एक शेर की हड्डियां देखी। उनमे से एक मित्र सत्यानंद ने शेर के बिखरे हुए हड्डियों को चुन कर इकठ्ठा किये और शेर के हड्डी से शेर का ढांचा अपने मंत्र विद्या से तैयार कर दिया। दूसरे मित्र ने ऐसा देखकर सेर के हड्डियों के ऊपर मांस और खाल चढ़ाने का निश्चय किया और अपने मंत्र विद्या से ऐसा करने में सफल रहा। अब तीसरे मित्र विद्यानंद ने अपनी प्रतिभा दिखने की बात सोची।  वह अपने मन्त्र शक्ति से शेर में प्राण डालने को उद्यत हुआ।

शिवानंद यह देखकर बहुत घबरा गया उसने उन …

ब्राम्हण, चोर और दानव - Thief Brahmin and Demon

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एक शहर में एक ब्राम्हण रहता था जिसने अपने सभी भौतिक सुख सुबिधाओं को त्याग दिया था। उसका नाम द्रोण था वह किसी भी विलासिता संबंधी वस्तुओं सुन्दर वस्त्र और सुगंध आदि का उपयोग नहीं करता था।

वह ठंडे गर्मी और बरसात के मौसम के दौरान भी पूजा की कठोर प्रथाओं का पालन किया करता था। इसके कारण, उसका शरीर दुबला और कमजोर हो गया था। उसके बाल और नाखून भी लंबे समय से देख भाल  नहीं करने के कारण काफी बढ़ गए थे।
उसके एक भक्त ने बछड़ों की एक जोड़ी भेंट की। वह बछड़ों का बहुत ख्याल रखता था और उन्हें अच्छी तरह से खिलता पिलाता था। इसके कारण कम समय में ही वो मोठे तगड़े हो गए।

एक दिन, एक चोर ने बछड़ों को देखा और सोचा, "मैं इसके पास से इन मोटे बछड़ों की चोरी करूँगा।"


उसने योजना बनाई है और रात में बछड़ों की चोरी करने के लिए एक रस्सी के साथ में ले कर आया। रास्ते में उसे  बहुत ही घृणित उपस्थिति में एक चोर से मुलाकात हुई।


चोर उसे देखकर डर गया और पूछा, "तुम कौन हो?"

दानव ने कहा, "मैं एक दानव हूँ। मैं हमेशा सच बलता हूँ और झूठ बोलने वाले से नफरत करता  हैं। तुम अपना परिचय दो !"

चोर ने कहा, &q…

कपोतराज चित्रग्रीव, कबूतर और बहेलिया - kapotraaj chitragriw and Fowler

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एक जंगल में बूढ़ा कबूतर था कपोत राज चित्रग्रीव वह कबूतर बहुत अनुभवी था. अपने कबूतरों की रक्षा किया करता था और समय समय पर उन्हें उचित परामर्श दिया करता था. कबूतरों को उनके मित्र और शत्रु के बारे में जानकारी देते रहता था. सभी कबूतर अपने राजा के बुद्धिमता का लाभ उठाते और सुख पूर्वक रहते थे.
एक दिन कबूतरों का झुंड उड़ते उड़ते जंगल के बीचो बीच पहुंच गया. उनके साथ उनका राजा कपोतराज चित्रग्रीव भी था. कबूतरों ने जंगल में चावल के दाने देखे. चावल के दाने देख कर सारे कबूतर लालच भरी निगाहों से चावल चुगने का मन बनना लगे. बूढ़ा कबूतर उनके मन की बात जान गया उसने कबूतरों को दाना चुगने से रोका .उसने कहा की इस निर्जन बन में चावल के कण कैसे सम्भव है. हमें इससे किसी अनहोनी घटना का अहसास हो रहा है.
भूख से ब्याकुल और लालच के बशीभूत कबूतरों ने चित्रग्रीव की बातों की अवहेलना कर दी और दाना चुगने सारे कबूतर उतर पड़े. जाल बिछाकर घात लगाए शिकारी इसी समय की  प्रतीक्षा में छुप कर बैठा था. कबूतरों को जाल पर बैठा देख वह बहुत खुश हुआ की बहुत सारे कबूतर एक साथ
सही नस्ल के मिल गए. कपोतराज चित्रग्रीव की अपने नादान बच्चों…

Merchant Five Children Tuti, Fati, Jali, Ganda, Panchar- कंजूस सेठ - Hospitality -

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सेठ की पांच संतान टूटी, फटी, जली, गन्दा, पंचर - अतिथि सत्कार  
एक कंजूस सेठ था। उसकी ५ संतान थी। इसमें २ बेटे और ३ बेटियां थी। उसने अपने कंजूसी को और सहज बनने के लिए बेटे बेटियों का नाम कुछ इस प्रकार रखा था। टूटी, फटी, जली, गन्दा और पंचर। टूटी, फटी और जली ये तिन बेटियां थी। गन्दा और पंचर दो बेटे थे। इन महाशय के घर कोई अतिथि आता नहीं था, अगर कोई आ भी गया गलती से तो उसकी ऐसी आव भगत करते के दुबारा आने का नाम नहीं लेता।


एक बार एक अतिथि महोदय इनके घर आये। ये महोदय सेठ जी के बचपन के मित्र सहपाठी रहे थे। सेठ जी अपने द्वार पर आये मित्र को देख कर सावधान हो गए। अपने मित्र के स्वागत करने के अंदाज में सेठ जी ने कहा आवो आवो मित्र बहुत दिन हो गए तुम्हारे दर्शन को।
मित्र के स्वागत में बैठने के लिए आसान देने के लिए साहुकार ने अपने बड़ी बेटी को आवाज लगायी
"बेटी टूटी! चारपाई लाना"
मित्र महोदय ने समझा मेरे बैठने के लिए टूटी चारपाई माँगा रहा है। गजब का स्वागत  है इसके यहाँ अतिथि का। सेठ जी के मित्र मन मारकर उस चारपाई पर बैठंने को तैयार हुए। सेठ जी ने उन्हें रोकते हुए कहा अरे ऐसे कैसे बैठेंगे।…

किसान की लड़की और साहुकार, दो कंकड़

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दो कंकड़, किसान की लड़की और साहुकार कई साल पहले एक छोटे से भारतीय गांव में, एक किसान दुर्भाग्य से एक साहुकार से पैसे की एक बड़ी राशि ले लिया था। साहुकार जो बूढ़ा और बदसूरत था किसान की सुन्दर बेटी पर लालच भरी नजर लगाया था। इसलिए वह किसान से एक सौदा का प्रस्ताव रखा। उसने कहा कि मैं तुम्हारा  कर्ज माफ़ कर दूंगा अगर तुम अपनी सुन्दर बेटी से मेरी शादी करवा दो।

किसान और उसकी बेटी दोनों इस प्रस्ताव से भयभीत थे। अतः धूर्त साहुकार ने सुझाव दिया की वो अपने भाग्य का निर्णय करें। उसने उन्हें बताया कि वह एक खाली पैसे के बैग में एक काला और एक सफेद कंकड़ डाल कर देगा। लड़की को उस बैग में से एक कंकड़ चुनना होगा।

अगर उसने काले कंकड़ उठाया, तो वह उसकी पत्नी बन जाएगी और उसके पिता का कर्ज माफ कर दिया जाएगा। अगर वह सफेद कंकड़ उठाती है, तो उसे मुझसे शादी नहीं करनी पड़ेगी और उसके पिता का ऋण भी माफ किया जाएगा।

वे दोनों किसान के खेत में एक कंकड़ बिखरे पथ पर खड़े थे। वे बात कर रहे थे इसी क्रम में , साहूकार दो कंकड़ लेने के लिए झुका। साहुकार ने जैसे कंकड़ उठाया, तेज आंखों वाली लड़की ने देखा कि वह दो काले कंकड़ उठाया …

The Elephant Rope - हाथी की रस्सी

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The Elephant Rope - हाथीकीरस्सी एक आदमी रास्ते से जा रहा था। रास्ते में उसे एक हाथी दिखा जो एक कमजोर रस्सी से बंधा हुआ था।  वह अचानक वहाँ रुक गया। उसे यह देख कर आश्चर्य हुआ की कैसे इतना बड़ा जानवर एक कमजोर रस्सी के सहारे ("जो उसके अगले पैर के साथ बंधी है") बंधा रह सकता है। नहीं कोई जंजीर, नहीं कोई पिंजड़ा। इस कमजोर रस्सी से सम्भव है हाथी कभी भी बंधन मुक्त हो सकता है, लेकिन वह ऐसा नहीं कर रहा क्या कारण है इसका ?
उसने वहाँ एक हाथी का प्रशिक्षक देखा। उसने प्रशिक्षक से पूछा हाथी क्यों इस कमजोर रस्सी से बाधा हुआ खड़ा है और भागने का बिलकुल भी प्रयास नहीं करता ?

हाथी के प्रशिक्षक ने जबाब दिया जब यह हाथी बहुत छोटा था तब मैं इसी रस्सी के सहारे इसे बाँधा करता था। तब ये रस्सी इतनी मजबूत थी की इसको पकडे रहती थी। और यह रस्सी तोड़कर नहीं भाग पता था। इसने रस्सी को  तोड़ने के लिए बहुत प्रयास किया लेकिन इसका प्रयास बिफल रहा।  हारकर इसने रस्सी को तोड़पाना असम्भव मान लिया और रस्सी पर जोर लगाना भी छोड़ दिया। धीरे धीरे यह बड़ा होता गया। इसे अभी भी लगता था की यह रस्सी इसे बांधे रखने में समर्थ है। इसने रस…

हमेशा सावधान रहें - Always be Alert

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हमेशा सावधान रहें -Always be Alert एकबार की बात है। जंगली में एक शेर रहता था वह इतना बूढ़ा हो गया था की शिकार करने में असमर्थ था। इसलिए उसने अपने आप से कहा , मुझे कुछ करना चाहिए पेट के लिए नहीं तो मैं भूखा मर जाऊंगा।
वह यही सोचता रहा तभी उसके दिमाग में एक उपाय सुझा। उसने निर्णय लिया की वह बीमार की तरह अपने गुफा में लेटा रहेगा। इस तरह जो कोई उसके स्वास्थ्य के बारे जानकारी लेने उससे मिलने आएगा सेर उसकी शिकार आसानी से कर लेगा। बूढ़े सेर ने अपने कुटिल योजना को प्रयोग में लाना शुरू किया।  वह कई दिनों तक बीमार की तरह अपने गुफा में पड़ा रहा। जंगल के जानवर जब कई दिनों तक सेर को गुफा से बहार निकलते नहीं देखे तो उसे बीमार समाज  कर उससे मिलने जाने लगे। सेर की गन्दी कुटिल नीति काम आने लगी। वह अपने पास आये जानवरों का आसानी से शिकार करने लगा। उसके बहुत से शुभ चिंतक जो उसके बीमार होने की खबर सुनकर हाल-चाल पूछने  गए मारे गए। लेकिन बुराई का अंत होता है। किसी भी बुराई की बहुत अल्प आयु होती है। 

एक दिन सेर से मिलने एक लोमड़ी आई। जैसा कि लोमड़ियां स्वभाव से चतुर होती हैं, लोमड़ी गुफा के मुहाने …

गलतियों से सबक सीखें - Learn Lesson From Failure

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विफलता सबक सिखाती है - गलतियों सबक से सीखें थॉमस एडिसन ने बिजली के बल्ब के अविष्कार के लिए फिलामेंट की खोज में हजारों धातुओं का परिक्षण किया। जब कोई पदार्थ संतोषजनक काम नहीं क्या तो उनके सहायक ने उनसे शिकायत की। आपका सारा परिश्रम व्यर्थ चला गया हम लोगों ने कुछ नहीं सीखा।
एडिसन ने दृढ़ता से जबाब दिया। अरे हमलोग इस अविष्कार के क्रम में बहुत लम्बी दुरी तय किये हैं और बहुत कुछ सीखे भी हैं। हम जान गए की २००० तत्व ऐसे हैं जिनका उपयोग हम प्रकाश बल्ब बनाने में नहीं कर सकते। We should learn Learn Lesson From Failure.


इस लघु कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमारा प्रयास कभी विफल नहीं जाता हमारा प्रत्येक प्रयास हमें कुछ न कुछ दे के जाता है।  हमारा प्रयास भले  ही हमें अपेक्षित परिणाम न दे लेकिन सीख तो दे ही जाता है। एडिसन ने अपने बल्ब के अविष्कार के क्रम में हज़ारों धातुओं / तत्वों का परिक्षण किया बल्ब के फिलामेंट के लिए कोई उपयुक्त तत्व नहीं मिला।  ("बल्ब का फिलामेंट बल्ब का वह भाग होता है जो जल  कर रोशनी प्रदान करता है।") लेकिन इस अविष्कार परिक्षण के क्रम में उन्हें बहुत से तत्वों के ग…

पंचतंत्र की कहानियां कैसे बनी

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एक समय की बात है अमरशक्ति नाम का राजा  महिलरोपयम के दक्षिण के प्रदेश में राज्य करता था। उसके पास तीन जिद्दी और मुर्ख शरारती  लड़के थे। उन बच्चों को पढ़ने से चिढ थी। राजा ने अपने लड़कों को पढ़ने के लिए कई अध्यापक नियुक्त किये। अध्यापक बच्चों को बहला फुलसला कर जैसे ही पढ़ना शुरु करते बच्चे सतर्क हो जाते और अध्यापक को मिलकर चिढ़ाने लगते और उसे भागने का नाना यत्न करने लगते। ऐसा जानकार की मेरे बच्चे कुछ नहीं सिख नहीं सकते राजा ने पुरे राज्य में घोषणा करवा दिया जो कोई मेरे इन जिद्दी जड़ बच्चों को पढ़कर शिक्षित कर देगा उस मुंहमांगा इनाम दिया जायेगा।
राजा के कर्मचारी यह फरमान पुरे राज्य में फैला दिए। इस घोषणा की खबर आचार्य विष्णु शर्मा के कान  में पड़ी। विष्णु शर्मा ने राजा के  जड़मति बच्चों को पढ़ना शुरू किया।

विष्णु शर्मा बच्चों को कहानिया सुनाने लगे।  बच्चे बड़ी तन्मयता से उनकी कहानी सुनाने  लगे। साथ ही वो शरारती बालक सतर्क भी थे की कही ये उपाध्याय भी धोके से और अध्यापकों की तरह पढ़ना न शुरू कर दे। बच्चों को जानवरों की कहानी  सुनाकर कहानी के माध्यम से विष्णु शर्मा नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ने लगा।  बच्चे…

आलसी और कामचोर गधा

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आलसी और कामचोर गधा - Lazy Donkey and Honest Master  भोला के पास कर्मठ नाम का एक गधा था। भोला बहुत ही दयालु और सहिष्णु मालिक था। गधा   अपने नाम के प्रतिकूल स्वभाव का था। वह बहुत अलसी और कामचोर था हरदम काम नहीं करने के नए नए बहने बनाते रहता था।
भोला नमक का व्यापर करता था और उसी नदी के रास्ते नमक गधे पे लाद कर शहर से गाँव लाता था। नदी पर पुल नहीं था लेकिन पानी काम होने के कारण लोग उसे पार कर जाया करते थे। एक बार जब वह नमक की बोरी अपनी पीठ पर लिए नदी से होकर गुजर रहा था तो अचानक नदी में गिर गया। उसने महसूस किया की उसके गिरने से पीठ पर लदे भार का वजन कुछ कम हुआ है, क्योंकि कुछ नमक पानी में घुलकर बह गया था।


इस दिन के बाद कर्मठ जानबूझकर नियम से नदी के पानी में बैठने लगा ताकि उसके पीठ पर का भार कुछ काम हो जाये। कर्मठ के इस ब्यवहार से भोला बहुत असंतुष्ट था, क्योंकि नमक के व्यापार में उसे घाटा लग रहा था। उसने कर्मठ को सबक सीखने के लिए निश्चय किया।

अगले दिन नमक के बोरी के बदले कर्मठ के पीठ पर उसने कपास से भरी बोरियां लाद दी। कर्मठ इस बदलाव से अनभिज्ञ था। उसे अपने मालिक के दयालुता और भोलेपन …

झगड़ालू बिल्ली और धूर्त बन्दर

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झगड़ालू बिल्ली और धूर्त बन्दर - Quarrelsome Cat and Cunning Monkey एक जंगल में पेड़ के  नीचे दो बिल्लोयों ने घर बना  रखा था। जंगल किनारे एक समृद्ध गावं होने से बिल्लियां पास के  गांव से कभी कभी स्वादिष्ट भोजन लय करती थी।  उनके दिन अच्छे से कट रहे थे।  कभी कभी ग्रामीणों से नजर बचा के वो दूध दही का भी मजा चख लिया करती थी।  ग्रामीण लोगों के अनाज का भंडार उनके आहार का मुख्य स्रोत था। अनाज के भंडार के पास प्रचुर मात्र में चूहे पाए जाते थे। बिल्लियां उन चूहों का शिकार कर मजे से जीवन यापन करते थे।
बिल्लियां जिस पेड़ के नीचे घर बन रखी थी उस पेड़ पर एक बन्दर का आवास था।  बन्दर भी अपने आहार के खोज में कभी कभी पास के गांव में जाया करता था। एक ही जगह आवास होने से और गांव के मार्ग में आते जाते मिलने से बन्दर और बिल्लियों में मित्रता हो गयी थी। इस मित्रता के नाते अब बिल्लियां जब कुछ अच्छा आहार मिलता जिसे बन्दर भी खा सकता था तो बिल्लिया उसे बन्दर के लिए लेते आती थीं।  बन्दर भी बिल्लियों का ख्याल रखता था और जब किसी घर की गृहस्वामिनी गृहकार्य में ब्यस्त होती थी , तो बिल्लियों की उस घर के दूध दही के बारे…

चालक खरगोश और मुर्ख सिंह

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चालक खरगोश और मुर्ख सिंह - Clever Rabbit and Foolish Lion एक जंगल में एक खूंखार सिंह रहता था।  वह अपने भूख की जरुरत से ज्यादा जानवरों की शिकार कर दिया करता था। जंगल में दूसरे जानवरों की संख्या कम होने लगी थी। सिंह के इस व्यवहार से जंगल के सभी जानवर बहुत दुखी थे। एक चतुर सियार के मध्यस्थता में उन्होंने सिंह के साथ एक बैठक बुलाई।

सिंह से सारे जानवरों ने निवेदन किया कि आप बिना जरुरत के निर्दोष जानवरों को न मारा करें। हम लोग आपकी सेवा में रोज एक जानवर भेज दिया करेंगे। ऐसे आपको अपने क्षुधा तृप्ति के लिए परिश्रम भी नहीं करना पड़ेगा। सिंह ने जानवरों के इस प्रस्ताव को मान लिया। लेकिन शर्त रखा कि जिस दिन तुम्हारे तरफ से कोई जानवर मेरे सेवा में नहीं भेजा गया उसदिन मैं और खूंखार हो जाऊंगा और ये संधि तोड़ दूंगा। सिंह  के  इस बात को सुनकर सभी जानवर उसे आश्वस्त किये की आप निश्चिन्त रहिेए आपकी   सेवा में रोज एक जानवर जायेगा.

अब जानवरों के वादे के अनुसार सिंह  के पास रोज एक एक जानवर भेजा जाने लगा। एक दिन खरगोश की बारी आई।  खरगोश देखने में छोटा था लेकिन था चालक। उसने जानवरों से विदा लेतेहु…