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शुक्रवार, 22 जुलाई 2016

कपोतराज चित्रग्रीव, कबूतर और बहेलिया - kapotraaj chitragriw and Fowler

एक जंगल में बूढ़ा कबूतर था कपोत राज चित्रग्रीव वह कबूतर बहुत अनुभवी था. अपने कबूतरों की रक्षा किया करता था और समय समय पर उन्हें उचित परामर्श दिया करता था. कबूतरों को उनके मित्र और शत्रु के बारे में जानकारी देते रहता था. सभी कबूतर अपने राजा के बुद्धिमता का लाभ उठाते और सुख पूर्वक रहते थे.
एक दिन कबूतरों का झुंड उड़ते उड़ते जंगल के बीचो बीच पहुंच गया. उनके साथ उनका राजा कपोतराज चित्रग्रीव भी था. कबूतरों ने जंगल में चावल के दाने देखे. चावल के दाने देख कर सारे कबूतर लालच भरी निगाहों से चावल चुगने का मन बनना लगे. बूढ़ा कबूतर उनके मन की बात जान गया उसने कबूतरों को दाना चुगने से रोका .उसने कहा की इस निर्जन बन में चावल के कण कैसे सम्भव है. हमें इससे किसी अनहोनी घटना का अहसास हो रहा है.
भूख से ब्याकुल और लालच के बशीभूत कबूतरों ने चित्रग्रीव की बातों की अवहेलना कर दी और दाना चुगने सारे कबूतर उतर पड़े. जाल बिछाकर घात लगाए शिकारी इसी समय की  प्रतीक्षा में छुप कर बैठा था. कबूतरों को जाल पर बैठा देख वह बहुत खुश हुआ की बहुत सारे कबूतर एक साथ
सही नस्ल के मिल गए. कपोतराज चित्रग्रीव की अपने नादान बच्चों पर दया आ गयी चित्रग्रीव ने कहा देखो तुम लोगों ने मेरी बात नहीं मानी सो इस जाल में फँस गए हो. अब एक मत से सभी मेरी बात मनोज तो तुम शिकारी से बच सकते हो. पेड़ की वोट में छुप शिकारी  तुम लोगों की तरफ चला आ रहा है. तुम लोग सारे मिल कर जोर  लगावो और जाल को लेकर उड़ जावो. सारे कबूतरों  ने मिलकर जोर लगाया और जाल ऊपर उठने लगा. कबूतर जाल लेकर उड़ गए शिकारी कुछ दूर उनका पीछा किया पर निराश हो कर चला गया.
अब चित्रग्रीव ने कबूतरों से कहा कि तुम लोग मेरे पीछे पीछे आवो. मई अपने मित्र हिरण्यक के पास चल रहा हूँ. मेरा मित्र हिरण्यक चूहा है उसके बहुत तीक्ष्ण दांत है. वह तुम लोगो के जालको काट देगा. सारे कबूतर मूषक राज हिरण्यक के पास पहुंचे. जाल लिए हुए सारे कबूतर निचे उतर पड़े.


मूषक राज हिरण्यक १०० से अधिक बिल बनकर सुख पूर्वक रहता था. कपोतराज चित्रग्रीव ने बिल के पास जाकर अपने मित्र हिरण्यक को आवाज लगायी .मूषक राज ने अपने मित्र की जानी पहचानी   आवाज सुनी तो विवर के बाहर आया. कपोत राज चित्रग्रीव ने कबूतरों के नादानी की कहानी सुनाई. सारा वृतांत सुनाने के बाद हिरण्यक जाल को काट दिया.

कपोतराज चित्रग्रीव की होशियारी  से सारे कबूतर जाल से मुक्त हो गए. अतः हमें अपने बड़ों का आदर करना चाहिए इसीमे हमारी भलाई है.

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