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बुधवार, 7 सितंबर 2016

चालाक बन्दर और मगर - Clever monkey and crocodile


किसी नदी के किनारे एक बहुत बहा पेड़ था । उस पर एक बन्दर रहता था । उस पेड़ पर बड़े मीठे फल लगते थे । बन्दर उन्हें भरपेट खाता और मौज उडाता । वह
अकेले ही मजे में दिन गुजार रहा था ।

एक दिन एक मगर उस नदी में से पेड़ के नीचे आया। बन्दर के पूछने पर मगर ने बताया की वह वहाँ खाने की तलाश में आया है । इम पर बन्दर ने पेड़ से तोड़कर बहुत से मीठे फल मगर को खाने के लिए दिए। इस तरह बन्दर और मगर में दोस्ती हो गई । अब मगर हर रोज़ वहाँ आता और दोनों मिलकर खूब फल खाते । बन्दर भी एक दोस्त पाकर बहुत खुश था ।

एक दिन बात-बात में मगर ने बन्दर को बताया की उसकी एक पत्नी है जो नदी
के उस पार उसके घर में रहती है । तब बन्दर ने उम दिन बहुत से मीठे फल मगर को उसकी पत्नी के लिए साथ ले जाने के लिए दिए। इस तरह मगर रोज़ जी भरकर फल खाता और अपनी पत्नी के लिए भी लेकर जाता। मगर की पत्नी को फल खाना तो अच्छा लगता पर पति का देर से घर लौटना पसन्द
नहीं था । एक दिन मगर की पत्नी ने मगर से कहा कि अगर वह बन्दर रोज-रोज इतने मीठे फल खाता है तो उसका कलेजा कितना मीठा होगा । मैं उमका कलेजा खाऊँगी। मगर ने उसे बहुत समझाया पर वह नहीं मानी। मगर जोरू का गुलाम था। उसके पत्नी के आगे उसकी एक न चलती थी।

पत्नी से मजबूर होकर मगरमच्छ दावत के बहाने बन्दर को  अपनी पीठ पर बैठाकर अपने घर लाने लगा । नदी बीच में उसने बन्दर को अपनी पत्नी की कलेजे वाली बात बता दी । इस पर बन्दर ने कहा कि, वो तो अपना कलेजा पेड़ पा ही छोड छाया है। वह उसे हिफाजत से पेड़ पर रखता है। इसलिए उसे वापिस जाकर कलेजा लाना पडेगा । मगर बन्दर को वापिस पेड़ के  पास ले गया । बन्दर छलांग मरकर पेड़ पर चढ़ गया । मगर नीचे बन्दर का इंतिजार कर रहा था। कुछ देर इतंजार करने के बाद मगर बन्दर से पूछा ? मित्र क्या हुआ कलेजा मिला की नहीं जल्दी आओ। बन्दर  हँसकर कहा कि "जाओ मूर्खराज  घर जाओ और अपनी पत्नी से कहना कि तुम
दुनिया के सबसे बड़े मूर्ख हौ । भला कोई  भी अपना कलेजा निकालकर अलग रख सकता है ।"

बन्दर की इम समझदारी से हमे पता चलता है कि मुसीबत के वक्त हमेँ कभी धैर्य
नही खोना चाहिए।

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