किसी को सही से समझने के लिए लंबा समय देना पड़ता है

एक बुद्धिमान बनिया के चार पुत्र थे। वह अपने पुत्रों को शिक्षा दे रहा था। बनिए ने अपने पुत्रों को एक दिन समझते हुए कहा की किसी भी चीज़ के बारे में हमें सही जानकारी लेने के लिए उसे लंबे समय तक देखना पड़ता है। तभी हम उसके प्रकृति और स्वभाव  के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

वणिक पुत्रों को पिता के बात पर विश्वास नहीं हुआ। एक पुत्र ने कहा की पिताजी किसी बस्तु को हम देख के कुछ छड़ों में ही इसके बारे में बता सकते है इसमें इतन समय व्यर्थ करने की क्या जरुरत है। उसके बात से बाकी दोनों भाइयों ने सहमति दिखाई। उन तीनो लड़कों ने एक साथ कहा पिता जी हम अपने दूकान में रखी बस्तु को तो शीघ्र ही पहचान जाते हैं फिर आप ऐसा क्यों बोल रहे हैं।

फिर उस वणिक ने चार चार महीने के अंतराल पर अपने सभी पुत्रों को संतरे के पेड़ खोजने के लिए भेजा। उसने कहा की अपने बाग़ में संतरे का पेड़ नहीं है हम चाहते हैं की अपने बाग़ में भी संतरे के पेड़ हो

पिता की आज्ञा पाकर पहला पुत्र पेड़ की तलाश में चल पड़ा। लोगो से पूछते हुए वह संतरे के पेड़ के पास पहुँचा। उसने संतरे के पेड़ को देखा वह टेढ़ा मेढा  और सुख हुआ था। सूखे पेड़ को देखकर वह उसे छोड़ कर चला गया उसने ऐसे पेड़ के पौधे ले जाने उचित नहीं समझा।

कुछ दिन बाद यानि चार महीने के अंतराल पर सेठ ने अपने दूसरे पुत्र को संतरे के पेड़ ढूढने और उसके पौधे लाने के लिए कहा। ढूढते ढूढते वह एक फलों के पौधों के नर्सरी में पहुँचा। पेड़ तो हरे भरे थे लेकिन उसमे फल नहीं लगा हुआ था अन्यमनस्क होकर वह उस पेड़ के पौधे अपने बगीचे में लगाने के लिए ले लिया।

अब ४ महीने बाद तीसरे पुत्र को पौधे के तलाश में भेजा गया। पौधे के तलाश में जब वह संतरे के पेड़ के पास पहुंच तो वहां जाकर उसने सुन्दर फलों से लदे संतरे के पेड़ को देखा। पेड़ देखकर बहुत खुस हुआ और उसका पौधा अपने साथ ले लिए

अब बनिए ने अपने सभी पुत्रों को बुलाया
पहला पुत्र पिताजी संतरे का पेड़  तो बिलकुल टेढ़ा मेढा और सुख था इसलिए मैंने उसके पौधे भी साथ नहीं लाया
दूसरे पुत्र ने उसे रोकते हुए कहा नहीं नहीं वो तो बिलकुल हरा भरा था लेकिन उसपर फल नहीं थे फिर भी आपकी आज्ञा से मैं वह पौधा ले कर आया हूँ

तीसरे पुत्र ने दूसरे के बात को काटते  कहा नहीं भैया उसपर फल भी लगे थे मैं सुन्दर फल भी लाया हूँ और पेड़ लगाने के लिए पौधे भी। तीसरे लड़के ने फल और पौधे दिखाते हुए ये बात कहा  .,

बनिये ने अपने पुत्रों से पूछा ? तीनो ने उत्तर दिया तीनो को सार समझ में आ गया था।

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ईमानदार लकड़हारा

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