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शरीर तुम्हारा अनमोल है फिर भिक्षाटन क्यों ?

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एक बार एक भिखारी एक सज्जन से भीख मांगने आया. भिखारी दीन दशा बनाए उस सज्जन से क्षुधा निवारण के लिए कुछ मांग रहा था .  उस सज्जन ने भिखारी से पूछा ? तुम भीख कयों मांगते हो ? भिखारी ने कहा मैं निर्धन हूँ इस लिए आजीविका  के लिए भिक्षाटन करता हूँ . उस सज्जन ने कहा भोले भिखारी मै देख रहा हूँ तुम बहुत धनी हो . भिखारी ने कहा कुछ भीख में दे दो साहब कयों गरीब का मजाक उड़ा रहे हो .

इसपर उस सज्जन ने कहा --> अब तुमसे मैं कुछ कीमती बस्तुएं मांग रहा हूँ .
१) सज्जन ने पूछा -तुम मुझसे १५००० रुपये ले लो और अपना बाया हाथ मुझे दे दो  भिखारी ने कहा नहीं महाशय ये हाथ मेरे अनमोल है मैं किसी कीमत पे ये नहीं दे सकता आपको क्षमा करना जी . २) अच्छा चलो ५०००० रुपये ले लो मुझे दोनों हाथ दे दो अपने भिखारी -> नहीं महाशय ये कैसी याचना है ? ३) चलो हाथ नहीं दोगे तो ५०००० रुपये में अपने एक नेत्र ही मुझे दे दो  भिखारी-> नहीं नहीं माफ़ करना जी मैं चलता हूँ 
उस सज्जन ने भिखारी को रोका और अपने यहाँ भोजन कराया . फिर उस सज्जन ने भिखारी को बताया की कोई भी व्यक्ति निर्धन नहीं है . प्रकृति प्रत्येक व्यक्ति को बहुत ही धनवा…

सुनो सबकी करो अपने मन की

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राजा के बकरे को भर पेट कौन खिलायेगा ?

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भोगा न भुक्ता वयमेव भुक्ता, तृष्णा न जीर्णा वयमेव जीर्ण. अर्थात भौतिक विषयों के भोग नहीं खत्म हुए हम मनुष्यों का जीवन ही समाप्त हो गया . तृष्णा ख़त्म नहीं हुई लेकिन विषय रसों का भोग करने वाली हमारी इन्द्रियाँ ही जीर्ण हो गयी . किसी आदमी के मुह में एक भी दांत नहीं हो लेकिन चने चबाने की तृष्णा use भी होती है . इस कहानी में एक बकरे के माध्यम से इस बात पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है. इस कहानी का पात्र रजा का एक बकरा है जिसे पेट भर खिला कर संतुष्ट कर देना है जिससे उसके सामने घास ले जाने पर वह खाने से इंकार कर दे .
कहानी कुछ इस प्रकार है . एक रजा था वह धर्म शास्त्र का ज्ञाता था . उसने अपने राज्य में एक प्रतियोगिता रखी . इस प्रतियोगिता के अनुसार राजा के बकरे को पेट भर घास खिलाकर संतुष्ट कर देना है जिससे वह सामने पड़ी घास को खाने में रूचि नहीं दिखाए . इस प्रतियोगिता को जितने वाले को यथोचित पुरस्कार दिया जायेगा. पुरे राज्य में इस प्रतियोगित की ढोल बजाकर घोषणा कर दी गयी . राजा की घोषणा सुनकर बहुत से प्रतियोगी इस प्रतियोगिता में भाग लेने आये . प्रतिभागी बारी बारी से बकरे को लेकर चराने के लिए…

क्या आप जानते हैं रविवार को रविवार ही क्यों कहा जाता है

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अगर आप किसी ईसाई या मुसलमान से पूछोगे कि sunday को sunday ही क्यों कहा जाता है? क्या कारण है इसका ? तो वह कुछ नहीं बता पायेगा . इस विषय में मैं अपने पिताजी से कल पूछा . उन्होंने बताया की सूर्य जिस ग्रह की होरा में उदित होता है उस दिन वही दिन माना  जाता है . जैसे सूर्य की होरा में सूर्योदय रविवार
चन्द्र की होरा में सूर्योदय सोमवार
मंगल की होरा में सूर्योदय मंगल वार
इसी तरह शनि की होरा में सूर्योदय शनिवार कहा जाता है
इतना प्रमाणिक है अपना सनातन धर्म . अंग्रेजों ने हमारे भारतीय संस्कृति कां अनुसरण और नक़ल किया और हमें हीं बुद्धू बनाने लगे. कुछ अबोध भारतीय आज भी अंग्रेजों का अनुसरण करते हैं . मेरे अक भ्रमित मित्र बोल रहा था कि, आज रविवार की रात्रि १२ बजे को दिन बदल जाएगा और सोमवार हो जाएगा . मैंने उसे उपरोक्त उद्धरण से समझाया और उसका भ्रम दूर हुआ . आज सभी बच्चों को पढाया जाता है की धरती गोल है इसे गैलिलियो ने बताया था . लेकिन जब आप किसी ज्योतिषी से पूछोगे तो वह इस झूठे गैलिलियो के दावे को झुठ्लायेगा. क्योंकि ज्योतिषियों को सदियों पूर्व ये बात पता था १२ राशि होती है और एक राशि ३० डिग्री की…

जब राजा ने बांध बनाकर नदी का पानी बंद कर दिया

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तीन तरह का हठ प्रसिद्ध है । बाल हठ राज़ हठ और त्रिया हठ । राजा अगर कोई  बात ठान ले तो उसे पूरा कर के ही रहता है । ऐसे ही एक कहानी है जिसमे एक राजा जिद मे आकर नदी की पानी को रोक दिया था जो उसके राज से होती हुई शत्रु देश मे जाती थी ।
एक बार युवा राजा अपने मंत्री के साथ नदी किनारे टहल रहा था। नदी का किनारा बहुत मनोरम था। राजा उस स्थल की सुंदरता देख कर मंत्र मुग्ध हो गया । राजा ने अपने मंत्री से पूछा ! मंत्री जी ये नदी कहाँ जाती है । नदी का प्रवाह पश्चिम से पूरब की ओर था । मंत्री ने जबाब दिया । महाराज इस नदी का पानी पूरब के देश को जाता है । राजा ने मंत्री से पूछा क्या पूरब के देश का राजा मेरा मित्र है । मंत्री ने जबाब दिया महाराज इस देश से आजकल सीमा विवाद के कारण शत्रुता चल रही है । ऐसा सुनकर राजा ने मंत्री से कहा ! मेरे राज्य का पानी शत्रु के देश मे नही जायेगा ।
राजा ने अपने मंत्री को आदेश दिया आज ही शीघ्र अति शीघ्र नदी का पानी रोक दिया जाये राजा के आदेश अनुसार मंत्री ने अधिक संख्या मे श्रमिक लगा दिये । श्रमिकों ने दोपहर से पहले नदी का पानी रोक दिया । नदी का पानी रुकने से नदी किनारे के…