लंगर की कहानी Reliance जियो के सन्दर्भ में


एक व्यक्ति नित्य लंगर चलाता था

लंगर मे खाने वालों की संख्या नित्य प्रतिदिन बढ़ती गयी ।

फ़िर एक दिन उस व्यक्ति ने लंगर के टेबल पर एक तरफ़ दान पेटी रख दी ।

दान पेटी पर लिखा था आप धर्मार्थ स्वैच्छिक दान दे सकते हैं ।

अब प्रसाद पाने के बहाने खाने आने वाले की संख्या दिन प्रति दिन घटने लगी ।

लंगर के आयोजक व्यक्ति समाज शास्त्री भी थे ।

भीड़ के इस व्यवहार से उन्हे अपने विषय पर शोध करने का अवसर भी मिल रहा था। कूछ दिन तक यूँ ही चलता रहा। फिर एक दिन अप शोध के क्रम में लंगर आयोजित करने वाले व्यक्ति ने दान पेटी को बदल दिया । अब दान पेटी पर लिखा था ।

धर्मार्थ न्यूनतम 1 रुपये दान पेटी मे डालें ।

लोग अब भी आते और jio की कस्टमर की तरह मुफ्त का खा कर चले जाते। लोग खाने के बाद सोचने पर मजबूर हो जाते कि दान पेटी मे पैसे डालूं या न डालूं । धीरे धीरे लोग दान पेटी मे 1 रुपये डालने लगे ।

वो लोग जिनको दान पेटी में 1 रुपये डालने में हिचकिचाह महसूस हो रही थी धीरे धीरे लंगर में आना छोड़ दिए .

यह कहानी jio के कुछ उपभोक्ताओं पर भी सार्थक सिद्ध होती दिखती है .

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